14/03/2025
क्या आपकी मिट्टी जीवित है, जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है...
क्या आपकी मिट्टी जीवित है, जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है...
यह मिट्टी हमारी मां है। इस मिट्टी पर हम इंसान जन्म लेते हैं। हमारे साथ ही रहते हैं असंख्य सूक्ष्म जीव। यह मिट्टी ही हमारे पूरे जीवन का आधार है। हम इंसान पूरा जीवन इस मिट्टी के सहारे ही जीते हैं। मिट्टी के जरिए हम पूरे दिन का भोजन पाते हैं। मिट्टी में ही स्वास्थ्य पाने के जतन करते हैं। देखिए इंसानी जीवन के साथ ही पूरे जीव जंतुओं का जीवन चक्र का आधार ही यह मिट्टी है। जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है।
प्यारे साथियों, आसपास के वातावरण पर नजर दौड़ाइए। देखिए, परखिए क्या आज हमारे आसपास की मिट्टी जीवित है इस सवाल का जवाब, नहीं है फिर क्या करें कि हमारी मिट्टी पुनर्जीवित हो जाए। जीवन के आधार को हम कैसे बचा पाएंगे
जीवित मिट्टी की जैव संरचना को बनाए रखना ही मिट्टी को बचाए रखना है। मिट्टी की भौतिक, रसायनिक स्थिति के साथ ही उनमें सूक्ष्म जीवियों का रहना जरूरी है। इसके बिना पेड़-पौधों का विकास नहीं हो पाता है। फसल नहीं उपजेगी तो हमें खाना कहां से मिलेगा ?
हमारे देश में किसान पहले मिट्टी तैयार करता है फिर फसल बोता है। तभी उपज हो पाती है। इसी उदाहरण से ही समझिए मिट्टी का स्वस्थ होना कितना जरूरी है। मिट्टी में उचित पोषक तत्वों के साथ जैव कार्बन की मौजूदगी उसे उपजाऊ बनाती है। मिट्टी की गुणवत्ता, जैव कार्बन और जैव संरचना एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।
मिट्टी में पाए जाने वाले फंगस, प्रोटोजोआ, शाकाहारी व मांसाहारी जीव नमी की मौजूदगी में कार्बनिक पदार्थों का जैव अपघटन कर उसे एंजाइम व अम्ल बदल देते हैं। इसी मिट्टी में उसे घुलित कर उन्हें पौधों के भोजन के लायक बना देते हैं।
हमारी मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होती है तो हमारे किसान रसायनिक उर्वरक डालकर पौधों को पोषक तत्व देते हैं। यह किसान के लिए बहुत खर्चीला है। लेकिन कम समय में ज्यादा उत्पादन लेने की होड़ में सभी किसानों के बीच यह ज्यादा लोकप्रिय हो गया है। इसका दुष्परिणाम यह हुआ है कि खेती में लागत का अनुपात बढ़ गया है। साथ ही यह हमारी मिट्टी को निरंतर मृतप्राय बना रही है।
रसायनिक उर्वरकों का अंधाधुध उपयोग मिट्टी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है। जल संधारण क्षमता भी कम हो गई है। बारिश का पानी भूतल में नहीं पहुंच पा रहा है। इन परिस्थितियों में भूजल का स्तर लगातार कम हो रहा है। मिट्टी की संरध््राता घट गई है। मिट्टी पत्थर सी चट्टान बन रही है। साथियों, ऐसी परिस्थितियों में कैसे इस मिट्टी में जीवन कैसे संभव है, आप ही बताइए ?
हां, एक अलग बात है कि अब आधुनिक व वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए बिना मिट्टी के भी फसलें उगाईं जा रही हैं। लेकिन यह केवल संसाधनयुक्त व्यक्तियों के पास है। विश्व का आम आदमी केवल मिट्टी पर आश्रित है। इसलिए साथियों, चलिए एक बार फिर शुरूआत करते हैं हमारी मिट्टी को स्वस्थ व उपजाऊ बनाने की। हमारे आधार तत्व को मजबूत करने की। हम अपनी मिट्टी को जीवन देंगे तो हम जीवन पाएंगे। इसी से पूरी धरती का जीवन चक्र है।