The Farm at North Chhattisgarh

The Farm at North Chhattisgarh The Farm at North Chhattisgarh – a place where nature, sustainability & agriculture come together in perfect harmony.

We are committed to sustainable farming, using eco-friendly methods to nurture the land and grow chemical-free crops.

हमें यह याद रखना है कि मिट्टी ही जीवन का आधार है और मिट्टी को धूल बनने से रोकना है। मिट्टी परीक्षण के लिए अभी कृषि वैज्ञ...
15/03/2025

हमें यह याद रखना है कि
मिट्टी ही जीवन का आधार है

और मिट्टी को धूल बनने से रोकना है।

मिट्टी परीक्षण के लिए अभी कृषि वैज्ञानिक कई विधियों का इस्तेमाल करते हैं। वे वृहद क्षेत्रों के लिए मिट्टी स्वास्थ्य मानचित्र, जीआईएस और रिमोट सेसिंग का उपयोग करते हैं। कृषि वैज्ञानिक मिट्टी की भौतिक आधार व लक्षण के अनुसार भी बिना मिट्टी परीक्षण किए जरूरी सलाह देते हैं। मिट्टी उन किसानों के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है जो कृषि को व्यवसाय के स्तर पर करते हैं। पाॅली हाउस में लगाई जाने वाली फसलों के पोषक तत्वों की उचित मात्रा निर्धारित करने के लिए मिट्टी परीक्षण आवश्यक हो जाता है।







जंगली क्षेत्रों की भूमि बेहद उपजाऊ होती है...------------------------------------------यदि भूमि ऐसे क्षेत्र में हो जहां ...
15/03/2025

जंगली क्षेत्रों की भूमि बेहद उपजाऊ होती है...
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यदि भूमि ऐसे क्षेत्र में हो जहां पर आर्गेनिक कार्बन की प्रतिशत मात्रा 0.75 से 9 प्रतिशत हो वहां की मिट्टी का परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक तत्वों प्रतिशत मात्रा अच्छी होती है। किसानों के साथ आपको यह बताते हुए मुझे अच्छा लग रहा है कि जंगली क्षेत्रों की भूमि अपनी पारिस्थतिक तंत्र की बदौलत बेहद उपजाऊ होती है।

मिट्टी परीक्षण तीन साल में एक बार कराना चाहिए। इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर द्वारा मृदा परीक्षण किट भी तैयार की गई है। इसमें आप सभी छह तत्वों की जांच अपने घर पर ही कर सकते हैं। एक किट से 50 नमूनों का परीक्षण किया जा सकता है। इसमें आपको छह परिणाम मिलेंगे जिसमें पीएच मान, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम और विद्युत चालकता शामिल हैं। आप अपनी मिट्टी को हमेशा अच्छा रखना चाहते हैं तो उस मिट्टी में जैविक कार्बन की उपस्थिति को निश्चित करें।

यहीं जैविक कार्बन ही है जो मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को पौधों को ग्रहण करने में सहायता देती है। अगर आप मिट्टी में जैविक कार्बन की उचित मात्रा को निश्चित करते हैं तो आप अपनी भूमि के स्वास्थ्य को अच्छा रखने में 50 फीसदी कामयाब हो जाते हैं। मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा कैसे बढ़ाएं इस पर आने वाले समय पर चर्चा करेंगे।






मिट्टी परीक्षण के लिए खेतों से नमूना कैसे एकत्र करें...------------------------------------------------किसानों को अपने ख...
15/03/2025

मिट्टी परीक्षण के लिए खेतों से नमूना कैसे एकत्र करें...
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किसानों को अपने खेतों से मिट्टी का नमूना कैसे एकत्र करना चाहिए। एक एकड़ के खेत से कम से कम 4 जगहों से नमूना इकट्ठा करना चाहिए। साथ ही समतल भूमि से नमूना इकट्ठा करें। पिलाई नाली, पेड़ के किनारों के पांच फीट का घेराव छोड़कर, गड्ढे व पानी भराव वाले क्षेत्रों से मिट्टी का नमूना नहीं लेना चाहिए।

आप नमूना लेने के लिए खुदाई औजार फावड़ा, आगर या खुरपी से अंग्रेजी के वी आकार में 15 सेमीमीटर का गड्ढा बनाएं। फिर ऊपरी सतह से लेकर 15 सेमीमीटर गहराई तक की मिट्टी नमूना के लिए निकाल लें और सभी नमूनों को अच्छे से मिलाएं और उसे एक प्लास्टिक शीट या साफ-सुथरी प्लास्टिक बोरी के ऊपर पर रखें।

सभी जगहों से हमारा नमूना एक एकड़ भूमि से ढाई किलो होना चाहिए। मिट्टी को मसलकर उसे पाउडर बना लें और उसे अपनी अंगुली की सहायता से चार भागों में बांटे। चतुर्भुज आकार के कोणों के हिस्सों को हटा लें और फिर बचे दो हिस्सों को मिला लें। इस प्रक्रिया को तब तक करें जब तक कि मिट्टी 250 ग्राम के आसपास बच जाए। इसे एक पालीथीन बैग में रख दें।

उस नमूने के साथ किसान अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार संख्या, भूमि का खसरा नंबर, भूमि का स्थानीय नाम, दिनांक, पहले लगाई गई फसल, इच्छित फसल का नाम, पूर्व में किए गए खाद का प्रयोग आदि विवरण की एक पर्ची डालकर उसे पैक कर दें। अब इसे किसी नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग या नजदीकी मिट्टी परीक्षण केंद्र में पहुंचाएं।

ध्यान रखे कि सब्जियों की गहरी जड़ों वाली फसलों के लिए 30 सेमीमीटर एवं बागवानी फसलों के लिए अंग्रेजी के वी आकार में एक मीटर की गहराई से नमूना इकट्ठा करना चाहिए।





खेती के लिए मिट्टी परीक्षण कराना है जरूरी..... बीते दिनों हमने जहरमुक्त भोजन व जीवांश मिट्टी पर चर्चा की थी। आपको याद दि...
15/03/2025

खेती के लिए मिट्टी परीक्षण कराना है जरूरी.....

बीते दिनों हमने जहरमुक्त भोजन व जीवांश मिट्टी पर चर्चा की थी।

आपको याद दिला दें कि जीवित मिट्टी में ही सूक्ष्मजीव फंगस, नीमेटोड, बैक्टिरिया, प्रोटोजोआ, छोटे जीव-जंतु उपस्थित रहते हैं। पौधों के आवश्यक विकास के लिए मिट्टी में 16-18 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती हैं।

मिट्टी में पोषक तत्वों की उपस्थिति की जांच के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया का पालन कर मिट्टी का सैंपल लिया जाता है। जांच में मिले परिणाम के आधार पर ही पोषक तत्वों की उचित मात्रा खेतों में डालने की सलाह किसानों को दी जाती है।

आप अपने छोटे से गार्डन या घर के पीछे की बाड़ी का भी मिट्टी परीक्षण कर पोषक तत्वों की उपस्थिति का पता लगाकर अच्छा परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

क्या आपकी मिट्टी जीवित है, जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है...
14/03/2025

क्या आपकी मिट्टी जीवित है, जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है...

क्या आपकी मिट्टी जीवित है, जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है...

यह मिट्टी हमारी मां है। इस मिट्टी पर हम इंसान जन्म लेते हैं। हमारे साथ ही रहते हैं असंख्य सूक्ष्म जीव। यह मिट्टी ही हमारे पूरे जीवन का आधार है। हम इंसान पूरा जीवन इस मिट्टी के सहारे ही जीते हैं। मिट्टी के जरिए हम पूरे दिन का भोजन पाते हैं। मिट्टी में ही स्वास्थ्य पाने के जतन करते हैं। देखिए इंसानी जीवन के साथ ही पूरे जीव जंतुओं का जीवन चक्र का आधार ही यह मिट्टी है। जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है।

प्यारे साथियों, आसपास के वातावरण पर नजर दौड़ाइए। देखिए, परखिए क्या आज हमारे आसपास की मिट्टी जीवित है  इस सवाल का जवाब, नहीं है  फिर क्या करें कि हमारी मिट्टी पुनर्जीवित हो जाए। जीवन के आधार को हम कैसे बचा पाएंगे

जीवित मिट्टी की जैव संरचना को बनाए रखना ही मिट्टी को बचाए रखना है। मिट्टी की भौतिक, रसायनिक स्थिति के साथ ही उनमें सूक्ष्म जीवियों का रहना जरूरी है। इसके बिना पेड़-पौधों का विकास नहीं हो पाता है। फसल नहीं उपजेगी तो हमें खाना कहां से मिलेगा ?

हमारे देश में किसान पहले मिट्टी तैयार करता है फिर फसल बोता है। तभी उपज हो पाती है। इसी उदाहरण से ही समझिए मिट्टी का स्वस्थ होना कितना जरूरी है। मिट्टी में उचित पोषक तत्वों के साथ जैव कार्बन की मौजूदगी उसे उपजाऊ बनाती है। मिट्टी की गुणवत्ता, जैव कार्बन और जैव संरचना एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।
मिट्टी में पाए जाने वाले फंगस, प्रोटोजोआ, शाकाहारी व मांसाहारी जीव नमी की मौजूदगी में कार्बनिक पदार्थों का जैव अपघटन कर उसे एंजाइम व अम्ल बदल देते हैं। इसी मिट्टी में उसे घुलित कर उन्हें पौधों के भोजन के लायक बना देते हैं।

हमारी मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होती है तो हमारे किसान रसायनिक उर्वरक डालकर पौधों को पोषक तत्व देते हैं। यह किसान के लिए बहुत खर्चीला है। लेकिन कम समय में ज्यादा उत्पादन लेने की होड़ में सभी किसानों के बीच यह ज्यादा लोकप्रिय हो गया है। इसका दुष्परिणाम यह हुआ है कि खेती में लागत का अनुपात बढ़ गया है। साथ ही यह हमारी मिट्टी को निरंतर मृतप्राय बना रही है।

रसायनिक उर्वरकों का अंधाधुध उपयोग मिट्टी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है। जल संधारण क्षमता भी कम हो गई है। बारिश का पानी भूतल में नहीं पहुंच पा रहा है। इन परिस्थितियों में भूजल का स्तर लगातार कम हो रहा है। मिट्टी की संरध््राता घट गई है। मिट्टी पत्थर सी चट्टान बन रही है। साथियों, ऐसी परिस्थितियों में कैसे इस मिट्टी में जीवन कैसे संभव है, आप ही बताइए ?

हां, एक अलग बात है कि अब आधुनिक व वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए बिना मिट्टी के भी फसलें उगाईं जा रही हैं। लेकिन यह केवल संसाधनयुक्त व्यक्तियों के पास है। विश्व का आम आदमी केवल मिट्टी पर आश्रित है। इसलिए साथियों, चलिए एक बार फिर शुरूआत करते हैं हमारी मिट्टी को स्वस्थ व उपजाऊ बनाने की। हमारे आधार तत्व को मजबूत करने की। हम अपनी मिट्टी को जीवन देंगे तो हम जीवन पाएंगे। इसी से पूरी धरती का जीवन चक्र है।






हम-आप क्या डाॅक्टर से  नियमित सलाह लेते हैं?इसका मतलब है कि आप अपनी हेल्थ को लेकर सजग रहते हैं। लेकिन क्या कभी आपने मिट्...
14/03/2025

हम-आप क्या डाॅक्टर से नियमित सलाह लेते हैं?

इसका मतलब है कि आप अपनी हेल्थ को लेकर सजग रहते हैं। लेकिन क्या कभी आपने मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में सोचा?

अच्छी गुणवत्ता के अनाज, फल व सब्जियों का सेवन करेंगे इम्युनिटी भी अच्छी रहेगी। आपका स्वास्थ्य बना रहेगा।

कम उम्र में ही आप क्राॅनिक डिसीस ब्लड प्रेशर, डायबिटिज या हृदय रोग की समस्याओं से ग्रस्त नहीं होंगे। यदि आप रोज की दिनचर्या में आसपास के खेत या बाड़ी में किसानों द्वारा उत्पादित सब्जियां, अनाज या फल का सेवन करेंगे तो न कभी इम्युनिटी कम होगी न कभी किसी बीमारियों का डर रहेगा।

मिट्टी स्वस्थ है तो समझिए फसलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता रहेगी। फसल में रसायनिक कीटनाशकों का स्प्रे नहीं करना पड़ेगा। इसका दूसरा मतलब है कि जाने-अनजाने में हमें जहर नहीं खाना पड़ेगा।

स्थायी खेती या पर्माकल्चर, प्राकृतिक या जैविक खेती ही आपके काम आएगी। हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखने में यही कारगर उपाय हैं।

अगर मिट्टी जीवित है, तो उसमें जीवांश है,
जीवांशयुक्त मिट्टी से उत्पादित भोजन जहरमुक्त है
तो क्या आप वाकई ऐसा जहरमुक्त भोजन कर पा रहे हैं






कैसे जानेंगे कि आपकी मिट्टी धूल है या जीवित मिट्टीयह वैज्ञानिक तरीका अपनाएं-  खेत के अलग-अलग जगहों से मिट्टी का सैंपल ले...
14/03/2025

कैसे जानेंगे कि आपकी मिट्टी धूल है या जीवित मिट्टी
यह वैज्ञानिक तरीका अपनाएं-

खेत के अलग-अलग जगहों से मिट्टी का सैंपल लेकर मृदा स्वास्थ्य लैब में जांच के लिए भिजवाइए। सैंपलिंग के तरीकों के बारे में हम अपने अगले ब्लाॅग में चर्चा करेंगे। आज पूरे विश्व में हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। हरेक को इम्युनिटी कम होने का डर सता रहा है।

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बाजार में अनेक सप्लीमेंट्स भी आ गए हैं। लेकिन क्या यह सप्लीमेंट्स हमारे लिए स्थायी उपाय है। क्या आप आर्थिक संकट के समय में अपने पैसे बाजार में लुटाते रहेंगे।

क्यों न हम मूलभूत कारणों को पहचानें जिससे बाजार के इस सप्लीमेंट कभी जरूरत ही न पड़े और पैसे भी बच जाएं।

हमारी मिट्टी का बुरा स्वास्थ्य ही बीमारियों का मूल हैै।





कैसे जानेंगे कि आपकी मिट्टी धूल है या जीवित मिट्टी ?रसायनों के उपयोग से मिट्टी में उपस्थित सूक्ष्मजीव नष्ट हो रहे हैं। ऐ...
14/03/2025

कैसे जानेंगे कि आपकी मिट्टी धूल है या जीवित मिट्टी ?

रसायनों के उपयोग से मिट्टी में उपस्थित सूक्ष्मजीव नष्ट हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमारी खेती कभी मुनाफे में नहीं आ पाएगी। आजकल खेतों में किसान केवल रसायनिक उर्वरकों पर निर्भर हो गए हैं। फसलों को रोगों से बचाने के लिए कीटनाशकों का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। इन सभी प्रक्रियाओं में किसान के मददगार सूक्ष्मजीव नष्ट हो रहे हैं।

इस तरह मिट्टी की पूरी खाद्य श्रृंखला खत्म हो रही है। इसके बाद भी हम उम्मीद करते हैं कि हमारे खेतों से बंपर फसल का उत्पादन होगा। यह कैसे संभव है।
अब आप कैसे जानेंगे कि आपकी मिट्टी धूल है या जीवित मिट्टी। जिसमें जीवांश कार्बन की उपस्थिति के साथ ही सूक्ष्मजीव मौजूद हैं या नहीं।

तरीका बहुत ही सरल है। हर व्यक्ति अपने खेत या बाड़ी में जाकर अपने हाथों में मिट्टी उठाकर जान सकता है कि मिट्टी स्वस्थ है या नहीं। उसमें जीवांश की मात्रा है या नहीं। अपने खेत, गार्डन या बाड़ी पर जाइए। पेड़ों के जड़ों के पास, गिरे पत्तों के नीचे या ऐसी जगह पर जहां पर जमीन प्राकृतिक रूप से ढकी हुई हो, वहां की मिट्टी अपने हाथों में उठाइए। वह मिट्टी नम व भुरभुरी होगी। जमीन को अपनी एक अंगुली से कुरेदिए, सख्त नहीं लगेगी। चार से छह इंच के नीचे केंचुए भी दिख जाएंगे।

अब खुले आसमान से भी एक मुट्ठी मिट्टी लीजिए और उसे मुट्ठी के बीच दबाकर देखिए। वह मिट्टी स्पंज की तरह दब जाएगी। मुट्ठी ढीला कीजिए, मिट्टी थोड़ी फैल जाएगी। अब इसे महसूस कीजिए इसमें भी हल्की नमी होगी। सूंघने पर गंध या दुर्गंध नहीं आएगी। ऐसे सभी पैरामीटर हैं तो आपकी मिट्टी स्वस्थ है। इसमें जीवांश है। मिट्टी स्वस्थ है यानि इसमें उपज देने की क्षमता है। मिट्टी में पैदावार की अच्छी गुंजाइश ही हमारी खेती को बचाएगी।






होली के लिए प्राकृतिक रंग ऐसे बनाएं...होली के लिए प्राकृतिक रंग बनाना न केवल सेहतमंद है बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षि...
14/03/2025

होली के लिए प्राकृतिक रंग ऐसे बनाएं...

होली के लिए प्राकृतिक रंग बनाना न केवल सेहतमंद है बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होता है।

आप इन्हें घर पर आसानी से तैयार कर सकते हैं। इन प्राकृतिक रंगों से होली मनाकर आप बिना किसी हानिकारक रासायनों के सुरक्षित और खुशियों वाली होली मना सकते हैं।

हम आपको यहाँ कुछ प्राकृतिक रंग बनाने के तरीके बताते हैं-

#सूखे रंग (गुलाल) बनाने के तरीके

1. लाल रंग –

चुकंदर: चुकंदर को काटकर सुखा लें और पीसकर पाउडर बना लें।
हिबिस्कस (गुड़हल) के फूल: इन्हें सुखाकर पीस लें।
संन्ट्रा (ऑरेंज) के छिलके: इन्हें सुखाकर पीसकर हल्का लाल-नारंगी रंग बनाया जा सकता है।

2. हरा रंग –

मेहंदी पाउडर: शुद्ध मेहंदी पाउडर एक अच्छा विकल्प है।
पालक: पालक को सुखाकर पीस लें।

3. पीला रंग –

हल्दी और बेसन: हल्दी को बेसन या आटे में मिलाकर हल्का पीला रंग तैयार करें।
गेंदे के फूल: इन्हें सुखाकर पीस लें।

4. नीला रंग –

नीले गुलमोहर के फूल (Jacaranda) को सुखाकर पीस लें।
जामुन के छिलके सुखाकर पीसें।

5. गुलाबी या बैंगनी रंग –

चुकंदर के टुकड़ों को सुखाकर पीसें।
जामुन या बैंगनी गोभी का रस निकालकर सुखा सकते हैं।

#तरल रंग बनाने के तरीके

1. लाल रंग – चुकंदर को पानी में उबालें और ठंडा होने पर छान लें।

2. हरा रंग – पालक या धनिया का रस निकालें और उसमें पानी मिलाएं।

3. पीला रंग – हल्दी को पानी में घोलें।

4. नीला रंग – नीले गुलमोहर के फूलों को रातभर पानी में भिगोकर रखें।

5. गुलाबी रंग – चुकंदर को पानी में डालकर कुछ घंटे के लिए छोड़ दें।

यह करें-

रंगों को बेसन, अरारोट या कॉर्नस्टार्च में मिलाकर गुलाल तैयार करें।
यदि तरल रंग बनाना हो, तो इसे छानकर इस्तेमाल करें।
घर के बने प्राकृतिक रंग त्वचा और बालों के लिए सुरक्षित होते हैं।





अपनी मिट्टी के प्रति बदलता हमारा नजरिया ही हमें अंधेरे खाई में धकेल रहा है... मिट्टी ही जीवन का आधार है हम भूल गए हैं। ब...
14/03/2025

अपनी मिट्टी के प्रति बदलता हमारा नजरिया ही
हमें अंधेरे खाई में धकेल रहा है...

मिट्टी ही जीवन का आधार है हम भूल गए हैं। बस उंचाइयां पाने की होड़ में आसमान में उड़ना चाहा है। अपने पैरों के नीचे से जमीन तो खिसक गई है। लेकिन कहते हैं न, जागो तभी सबेरा। ऐसा ही समझकर अपनी पूरी मिट्टी को धूल बनने से रोकना है।

चलिए एक कल्पना कीजिए, एक दिन ऐसा दृश्य देखेंगे कि आप 20 लाख आबादी वाले शहर में गिनती के पेड़ बचे हों, तेज गर्मी में आपका शरीर जल रहा है। पानी के लिए प्रशासन का आदेश हो कि हर व्यक्ति निर्धारित मात्रा में ही पानी पी पाएगा। चारों ओर काली धूल पटी हुई हो। कैसे जी पाएंगे। ऐसे में इस धरती पर जीवन का क्या होगा। हम इस मिट्टी पर क्या उगा पाएंगे। कुछ भी नहीं।
बिना सूक्ष्म जीवियों के इस धरती पर जीवन ही नहीं है। हम इंसान अपने आप को कितना भी महान बना लें लेकिन सूक्ष्मजीवों की भूमिका हम नहीं निभा पाएंगे। इसलिए प्यारे साथियों, हमें मिट्टी को मृत होने से रोकना है।





कहीं आप भोजन के रूप में जहर तो नहीं खा रहे हैं ?जीवित मिट्टी में ही सूक्ष्मजीव फंगस, नीमेटोड, बैक्टिरिया, प्रोटोजोआ, छोट...
14/03/2025

कहीं आप भोजन के रूप में जहर तो नहीं खा रहे हैं ?

जीवित मिट्टी में ही सूक्ष्मजीव फंगस, नीमेटोड, बैक्टिरिया, प्रोटोजोआ, छोटे जीव-जंतु उपस्थित रहते हैं। लेकिन क्या आज भी उसे हम पहले जैसा ही रख पा रहे हैं। क्या आज भी पहली बारिश के बाद मिट्टी से सौंधी महक आती है। क्या आज भी आप सावन के महीने में रेड वेलवेट माइट्स (सावन का कीड़ा) देख पाते हैं। क्या आपके खेत या बाड़ी में बड़ी संख्या में केंचुए दिखते हैं। शायद बहुत ही कम।
पारिस्थितिक तंत्र (इकोलाजी सिस्टम) में बदलाव के साथ ही सब कुछ बदल सा गया है। न हमें आसमान साफ दिखता है, न पानी पारदर्शी और न धरती पर हरियाली। सबने धूल की चादर ओढ़ ली है। इसके लिए जिम्मेदार इंसानी आधुनिक जीवनशैली है। आधुनिकता का ऐसा दौर आ गया है कि अब हमारे देश में किसी व्यक्ति के पैरों पर मिट्टी लगी हुई हो तो उसे गंवार, अनपढ़, मजदूर व मजबूर समझ लिया जाता है। कब हम खाद्य सुरक्षा की गांरटी लेने वाले किसानों को अपना भाग्यविधाता मानेंगे?





क्या आपकी मिट्टी जीवित है, जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है...यह मिट्टी हमारी मां है। इस मिट्टी पर हम इंसान ज...
14/03/2025

क्या आपकी मिट्टी जीवित है, जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है...

यह मिट्टी हमारी मां है। इस मिट्टी पर हम इंसान जन्म लेते हैं। हमारे साथ ही रहते हैं असंख्य सूक्ष्म जीव। यह मिट्टी ही हमारे पूरे जीवन का आधार है। हम इंसान पूरा जीवन इस मिट्टी के सहारे ही जीते हैं। मिट्टी के जरिए हम पूरे दिन का भोजन पाते हैं। मिट्टी में ही स्वास्थ्य पाने के जतन करते हैं। देखिए इंसानी जीवन के साथ ही पूरे जीव जंतुओं का जीवन चक्र का आधार ही यह मिट्टी है। जिस मिट्टी में जीवन नहीं है, वह केवल धूल है।

प्यारे साथियों, आसपास के वातावरण पर नजर दौड़ाइए। देखिए, परखिए क्या आज हमारे आसपास की मिट्टी जीवित है  इस सवाल का जवाब, नहीं है  फिर क्या करें कि हमारी मिट्टी पुनर्जीवित हो जाए। जीवन के आधार को हम कैसे बचा पाएंगे

जीवित मिट्टी की जैव संरचना को बनाए रखना ही मिट्टी को बचाए रखना है। मिट्टी की भौतिक, रसायनिक स्थिति के साथ ही उनमें सूक्ष्म जीवियों का रहना जरूरी है। इसके बिना पेड़-पौधों का विकास नहीं हो पाता है। फसल नहीं उपजेगी तो हमें खाना कहां से मिलेगा ?

हमारे देश में किसान पहले मिट्टी तैयार करता है फिर फसल बोता है। तभी उपज हो पाती है। इसी उदाहरण से ही समझिए मिट्टी का स्वस्थ होना कितना जरूरी है। मिट्टी में उचित पोषक तत्वों के साथ जैव कार्बन की मौजूदगी उसे उपजाऊ बनाती है। मिट्टी की गुणवत्ता, जैव कार्बन और जैव संरचना एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।
मिट्टी में पाए जाने वाले फंगस, प्रोटोजोआ, शाकाहारी व मांसाहारी जीव नमी की मौजूदगी में कार्बनिक पदार्थों का जैव अपघटन कर उसे एंजाइम व अम्ल बदल देते हैं। इसी मिट्टी में उसे घुलित कर उन्हें पौधों के भोजन के लायक बना देते हैं।

हमारी मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होती है तो हमारे किसान रसायनिक उर्वरक डालकर पौधों को पोषक तत्व देते हैं। यह किसान के लिए बहुत खर्चीला है। लेकिन कम समय में ज्यादा उत्पादन लेने की होड़ में सभी किसानों के बीच यह ज्यादा लोकप्रिय हो गया है। इसका दुष्परिणाम यह हुआ है कि खेती में लागत का अनुपात बढ़ गया है। साथ ही यह हमारी मिट्टी को निरंतर मृतप्राय बना रही है।

रसायनिक उर्वरकों का अंधाधुध उपयोग मिट्टी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है। जल संधारण क्षमता भी कम हो गई है। बारिश का पानी भूतल में नहीं पहुंच पा रहा है। इन परिस्थितियों में भूजल का स्तर लगातार कम हो रहा है। मिट्टी की संरध््राता घट गई है। मिट्टी पत्थर सी चट्टान बन रही है। साथियों, ऐसी परिस्थितियों में कैसे इस मिट्टी में जीवन कैसे संभव है, आप ही बताइए ?

हां, एक अलग बात है कि अब आधुनिक व वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए बिना मिट्टी के भी फसलें उगाईं जा रही हैं। लेकिन यह केवल संसाधनयुक्त व्यक्तियों के पास है। विश्व का आम आदमी केवल मिट्टी पर आश्रित है। इसलिए साथियों, चलिए एक बार फिर शुरूआत करते हैं हमारी मिट्टी को स्वस्थ व उपजाऊ बनाने की। हमारे आधार तत्व को मजबूत करने की। हम अपनी मिट्टी को जीवन देंगे तो हम जीवन पाएंगे। इसी से पूरी धरती का जीवन चक्र है।






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