07/03/2026
राजस्थान के नागौर जिले के करणू गांव की गजरा कंवर की कहानी त्याग, निष्ठा और अटूट समर्पण की अनोखी मिसाल है। लगभग 85 वर्ष पहले विवाह के सात फेरों के तुरंत बाद ही उनके पति मूलसिंह पातावत का असमय निधन हो गया। यह पल किसी भी नवविवाहिता के लिए असहनीय होता, लेकिन गजरा कंवर ने अपने दुःख को शक्ति में बदल दिया। उन्होंने अपने पति की तलवार को उनके प्रतीक के रूप में सहेजकर ससुराल में प्रवेश किया और जीवनभर उसे ही अपना सुहाग मानते हुए पतिव्रता धर्म निभाया।
यह कहानी किसी अंधविश्वास की नहीं, बल्कि एक स्त्री के अटूट प्रेम, आत्मबल और संस्कारों की है। गजरा कंवर ने परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय अपने जीवन को मर्यादा, धैर्य और सम्मान के साथ जिया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा समर्पण शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से दिखाई देता है। ऐसी प्रेरणादायक कथाएं समाज को अपनी जड़ों और मूल्यों से जोड़ती हैं।