15/03/2026
Eidi ki tayaari!
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हम अपने चाँद को देख कुछ समझ नहीं पाते है ,
चाँद देख कर लोग जश्न -ए- ईद मनाते है ,
वो चाँद के दीदार को जब वो छत पर आते हैं ,
उन्हें देखकर 'कल ईद है' हम समझ जाते हैं,
समझ में नहीं आता एक चाँद दूसरे चाँद को देखने क्यों आता है,
एक चाँद देख कर मेरे ईद के तारीख बदल जाते हैं ,
हम उनको देख कर ही ईद मनाते हैं,
सहर में ही हम ईदगाह को निकल जाते हैं ,
सब लोग फिर यही समझ जाते है ,
एक चाँद का दीदार जनाब यही कर पाते हैं ,
कुछ लोग मेरा तो हंसी मज़ाक खूब उड़ाते हैं ,
इश्क़ वाले ही मेरे चाँद -ए- दीद को समझ पाते हैं ,
तुम छत पर यू ही चाँद -ए- दीद को ना आया करो, मेरी ईद की तारीख बदल जाते हैं
ईद के दिन भी अगर हमने नए कपडे पहनें, तो हम बेवजह बदनाम हो जाते हैं ,
गोविन्द 'अलीग'