07/07/2026
तुलसीपुर — हमारा वही बचपन वाला जन्मस्थान… 🏡❤️
अपने जन्मस्थान को फिर से देखना…
और उस कर्मस्थल पर लौटना, जहाँ मेरे पिता ने अपने जीवन के 45 साल बिताए — इस एहसास को शब्दों में बयां करना सच में आसान नहीं है।
यही वह जगह है जहाँ उन्होंने 45 वर्षों तक Head Cashier के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।
इस बार वहाँ जाना और भी खास था, क्योंकि हमारे साथ बच्चे, जमाई और नाती-नातिन भी थे।
वहीं अपने भतीजे, उसकी पत्नी, पुराने दोस्तों और हम बहनों की जन्मभूमि से जुड़ी यादों से मिलना — हर पल दिल को छू रहा था।
लेकिन इस बार एक कमी बहुत गहराई से महसूस हो रही थी…
हमारी माँ हमारे साथ नहीं थीं।
उनकी यादें ही हमारे साथ थीं, जो आँखों को नम कर रही थीं।
हम सब उस घर को देख रहे थे, जहाँ माँ 15 साल की उम्र में शादी करके आई थीं और 48 साल वहीं बिताकर हमें छोड़कर चली गईं।
हर कोना जैसे उनकी मौजूदगी का एहसास करा रहा था।
छोटे बच्चे अपने नानी-नाना के घर को देखकर बहुत खुश थे।
अपनी माँ की जन्मभूमि को देखकर और उनके बताए हर कोने को पहचानते हुए, वे बच्चे हर जगह की तस्वीरें ले रहे थे — जैसे उन तस्वीरों में अपनी माँ को महसूस कर रहे हों।
क्योंकि मेरी बहन भी 40 साल से पहले ही इन दो छोटे बच्चों को छोड़कर अपनी माँ के पास चली गई थी।
उनके लिए यह सब एक नई दुनिया थी,
लेकिन हमारे लिए यह यादों का अथाह सागर था।
बच्चे उस जगह को देखकर उत्साहित थे,
और हम उस जगह को महसूस कर रहे थे…
जहाँ हमारी और उनकी माँ की जड़ें थीं।
अब न हमारी माँ हमारे साथ थीं,
और न ही इन बच्चों की माँ…
साथ थीं तो बस उनकी यादें, जो हर पल हमारे दिलों में जीवित हैं।
इस जगह का नाम है तुलसीपुर शुगर मिल, जिसे बलरामपुर शुगर मिल भी कहा जाता है।
वहाँ पहुँचते ही हर किसी के मन में कुछ न कुछ चल रहा था।
किसी को अपना बचपन याद आ रहा था,
किसी को अपने पुराने लोग,
किसी को माँ-बाप की याद,
और किसी को वह समय, जो कभी लौटकर नहीं आता।
सच कहूँ तो वहाँ जाकर हम सब फिर से बच्चे बन गए।
बच्चों जैसी हरकतें, बच्चों जैसी हँसी, बच्चों जैसी उत्सुकता…
बस कमी थी तो समय की।
क्योंकि वहाँ से हमें अयोध्या के लिए निकलना था।
कुछ ही घंटों में आगे बढ़ना था, लेकिन सच यह है कि वहाँ से कोई भी जाना नहीं चाहता था।
हर कोई उस पल को थोड़ा और जीना चाहता था…
थोड़ा और ठहरना चाहता था…
थोड़ा और अपने बीते समय को महसूस करना चाहता था।
लेकिन फिर सबने दिल को समझाया और अयोध्या के लिए निकल पड़े,
क्योंकि शाम की आरती देखनी थी,
और रात में राम जी के भव्य राम मंदिर के दर्शन करने थे। 🙏
कुछ जगहें सिर्फ जगह नहीं होतीं…
वह हमारी जड़ें होती हैं, हमारी पहचान होती हैं,
और हमारी जिंदगी का वह हिस्सा होती हैं,
जो कभी पुराना नहीं होता। ❤️
— Anita Agarwal
Good Homes by Anita | GHBA