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जो करना है, आज करो… क्योंकि कल सिर्फ एक उम्मीद है, आज हमारे हाथ में है।
23/07/2026

जो करना है, आज करो… क्योंकि कल सिर्फ एक उम्मीद है, आज हमारे हाथ में है।

“बेटी, उसका कमरा और उसकी अलमारी की कहानी”बेटी की शादी के बाद उसका कमरा खाली हो जाता है, उसकी अलमारियाँ भी खाली हो जाती ह...
12/07/2026

“बेटी, उसका कमरा और उसकी अलमारी की कहानी”

बेटी की शादी के बाद उसका कमरा खाली हो जाता है, उसकी अलमारियाँ भी खाली हो जाती हैं… लेकिन माँ का दिल कभी खाली नहीं होता।

धीरे-धीरे माँ उस कमरे और अलमारियों में घर का दूसरा सामान रख देती है। उसे लगता है—बेटी आएगी, तो थोड़ी-सी जगह बना दूँगी।

लेकिन जब बेटी वापस आती है और अपनी ही अलमारी में जगह नहीं पाती, तो मुस्कराकर कहती है—

“माँ, कमाल हो तुम… जितनी भी जगह मिल जाए, सब भर देती हो!” 😄❤️

सच तो यह है कि शादी के बाद बेटी का मायका कभी पराया नहीं होता, लेकिन अब उसका अपना एक नया घर भी होता है।

चाहे वहाँ उसके पास सिर्फ एक कमरा हो, एक फ्लोर हो या पूरा घर—अब वही उसका घर है। वही घर जिसे वह प्यार से सजाएगी, सँभालेगी और बसाएगी, बिल्कुल वैसे ही जैसे उसने अपनी माँ को अपना घर सँवारते हुए देखा था।

माँ अपनी बेटी को अलमारी में जगह देती है, लेकिन उससे कहीं बड़ी जगह हमेशा अपने दिल में रखती है।

और बेटी चाहे कितनी भी दूर चली जाए, माँ के लिए वह हमेशा वही छोटी-सी बेटी रहती है, जो कभी अपने कमरे और अलमारियों को देखकर खुशी से कहती थी—

“इतना बड़ा कमरा और इतनी सारी अलमारियाँ… Thank you, Mummy Papa!” 💖

आज बेटी अपने नए घर को सजा रही है और माँ दूर बैठी यही दुआ कर रही है—

“मेरी बेटी जहाँ भी रहे, उसका घर हमेशा प्रेम, सम्मान, शांति और खुशियों से भरा रहे।” 🙏❤️

अगर आप भी एक माँ या बेटी के रूप में इस कहानी से खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं, तो comment में जरूर लिखिए—

Love you Maa ❤️
या
Love you Beti ❤️

अगर आप एक पिता या भाई हैं, तो आप भी लिख सकते हैं—

Love you Beta ❤️
या
Love you Behen ❤️

अपनी बेटी, बहन या माँ को इस post में tag जरूर कीजिए, क्योंकि यह कहानी सिर्फ मेरी और मेरी बेटी की नहीं है—यह हर माँ और हर बेटी की कहानी है।

आपके comments, love और support ही मुझे ऐसी और दिल से जुड़ी stories बनाने की प्रेरणा देंगे। 🙏❤️

— Anita Agarwal | GHBA

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अब चलते हैं लखीमपुर की तरफ… 🚗❤️अभी तक आपने मेरी reels में Kolkata, Ayodhya और Tulsipur की झलक देखी…अब मैं आपको लेकर चलती...
07/07/2026

अब चलते हैं लखीमपुर की तरफ… 🚗❤️

अभी तक आपने मेरी reels में Kolkata, Ayodhya और Tulsipur की झलक देखी…
अब मैं आपको लेकर चलती हूँ Lakhimpur, जहाँ हम सबको एक house opening ceremony में जाना था

Pinki and Aashish ji congratulations.

असल में हमारा plan पहले से Lakhimpur जाने का था,
लेकिन बीच में Kolkata जाना पड़ा — एक बहुत दुखद घटना के कारण।
मैंने अपने cousin को unexpectedly खो दिया… उनकी sudden death ने दिल को बहुत भारी कर दिया। 😔

इसी दुख और जिम्मेदारी के बीच यह पूरा सफर चलता रहा।

Lakhimpur में kirtan था, मकान का मुहूर्त था, और सबसे अच्छी बात यह थी कि हम सब बहनें अपनी families और बच्चों के साथ फिर से मिल पाए।

ऐसे family functions की सबसे खूबसूरत बात यही होती है —
एक ही जगह पर रिश्ते, यादें, हँसी, शरारतें और थोड़ा emotional drama सब मिल जाता है। ❤️

जब बच्चे छोटे थे, तो बाल पकड़-पकड़कर लड़ते थे,
आपस में मार-पीट भी कर लेते थे। 😂

अब बड़े हो गए हैं…
तो या तो थोड़ी बहस कर लेते हैं,
या फिर चुगली-चट्टी से ही काम चला लेते हैं। 😃😂

क्योंकि बड़े हो गए हैं ना…
अब fight भी थोड़ी mature हो गई है। 🤣

— Anita Agarwal
Good Homes by Anita | GHBA

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तुलसीपुर — हमारा वही बचपन वाला जन्मस्थान… 🏡❤️अपने जन्मस्थान को फिर से देखना…और उस कर्मस्थल पर लौटना, जहाँ मेरे पिता ने अ...
07/07/2026

तुलसीपुर — हमारा वही बचपन वाला जन्मस्थान… 🏡❤️

अपने जन्मस्थान को फिर से देखना…
और उस कर्मस्थल पर लौटना, जहाँ मेरे पिता ने अपने जीवन के 45 साल बिताए — इस एहसास को शब्दों में बयां करना सच में आसान नहीं है।
यही वह जगह है जहाँ उन्होंने 45 वर्षों तक Head Cashier के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।

इस बार वहाँ जाना और भी खास था, क्योंकि हमारे साथ बच्चे, जमाई और नाती-नातिन भी थे।
वहीं अपने भतीजे, उसकी पत्नी, पुराने दोस्तों और हम बहनों की जन्मभूमि से जुड़ी यादों से मिलना — हर पल दिल को छू रहा था।

लेकिन इस बार एक कमी बहुत गहराई से महसूस हो रही थी…
हमारी माँ हमारे साथ नहीं थीं।
उनकी यादें ही हमारे साथ थीं, जो आँखों को नम कर रही थीं।

हम सब उस घर को देख रहे थे, जहाँ माँ 15 साल की उम्र में शादी करके आई थीं और 48 साल वहीं बिताकर हमें छोड़कर चली गईं।
हर कोना जैसे उनकी मौजूदगी का एहसास करा रहा था।

छोटे बच्चे अपने नानी-नाना के घर को देखकर बहुत खुश थे।

अपनी माँ की जन्मभूमि को देखकर और उनके बताए हर कोने को पहचानते हुए, वे बच्चे हर जगह की तस्वीरें ले रहे थे — जैसे उन तस्वीरों में अपनी माँ को महसूस कर रहे हों।
क्योंकि मेरी बहन भी 40 साल से पहले ही इन दो छोटे बच्चों को छोड़कर अपनी माँ के पास चली गई थी।
उनके लिए यह सब एक नई दुनिया थी,
लेकिन हमारे लिए यह यादों का अथाह सागर था।

बच्चे उस जगह को देखकर उत्साहित थे,
और हम उस जगह को महसूस कर रहे थे…
जहाँ हमारी और उनकी माँ की जड़ें थीं।

अब न हमारी माँ हमारे साथ थीं,
और न ही इन बच्चों की माँ…
साथ थीं तो बस उनकी यादें, जो हर पल हमारे दिलों में जीवित हैं।

इस जगह का नाम है तुलसीपुर शुगर मिल, जिसे बलरामपुर शुगर मिल भी कहा जाता है।

वहाँ पहुँचते ही हर किसी के मन में कुछ न कुछ चल रहा था।
किसी को अपना बचपन याद आ रहा था,
किसी को अपने पुराने लोग,
किसी को माँ-बाप की याद,
और किसी को वह समय, जो कभी लौटकर नहीं आता।

सच कहूँ तो वहाँ जाकर हम सब फिर से बच्चे बन गए।
बच्चों जैसी हरकतें, बच्चों जैसी हँसी, बच्चों जैसी उत्सुकता…
बस कमी थी तो समय की।

क्योंकि वहाँ से हमें अयोध्या के लिए निकलना था।
कुछ ही घंटों में आगे बढ़ना था, लेकिन सच यह है कि वहाँ से कोई भी जाना नहीं चाहता था।

हर कोई उस पल को थोड़ा और जीना चाहता था…
थोड़ा और ठहरना चाहता था…
थोड़ा और अपने बीते समय को महसूस करना चाहता था।

लेकिन फिर सबने दिल को समझाया और अयोध्या के लिए निकल पड़े,
क्योंकि शाम की आरती देखनी थी,
और रात में राम जी के भव्य राम मंदिर के दर्शन करने थे। 🙏

कुछ जगहें सिर्फ जगह नहीं होतीं…
वह हमारी जड़ें होती हैं, हमारी पहचान होती हैं,
और हमारी जिंदगी का वह हिस्सा होती हैं,
जो कभी पुराना नहीं होता। ❤️

— Anita Agarwal
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After marriage beti guest ke jaise haste hue aati hai sasural se apne ghr ,aur fir haste hue chali jati hai mayke se  sa...
10/01/2026

After marriage beti guest ke jaise haste hue aati hai sasural se apne ghr ,aur fir haste hue chali jati hai mayke se sasural matlab apne ghr ,aati hai bahut bate krne ke do h kr aati hai ki yeh bolenge wah bolenge but fir Bina bole chali jati hai kyoki ab 2 /2 ghr hone ke bad bhi ab uska koi ghr nahi hota hai ,ek mayka aur ek sasural ,aur fir dono ghr ki izzat ab uske hath mai hai soch kr na yaha ki waha ,aur na waha ki yaha bol pati hai ,pata nahi betiya kaise shadi hote hi itni badi ho jati hai .

🛡️ Shield kabhi shor nahi karti…
Woh shaant reh kar apne ko safe karti hai.
Jo apne liye sab kuch sahi maanta hai,
woh kisi aur ki takleef kabhi nahi sunta.
Jab bolne se sirf shor badhe,
to react nahi — protect karna zaroori hota hai.
Physical ya mental abuse
kisi bhi rishte mein acceptable nahi hota —
chahe husband ho, father ho, brother ho ya koi aur.
Selective morality sabse bada injustice hoti hai —
jab niyam sirf ek ke liye ho
aur baaki sab ke liye sab kuch “normal”.
Jab dard chup rehta hai,
woh gusse, khamoshi ya galat aadaton ke roop mein bahar aata hai.
Par problem yeh nahi ki koi toot raha hai —
problem yeh hai ki hum use samajhne ke bajay judge karte hain.
Cheekh kar baat kaage nahi badhti,
shaant boundary poore system ko hila deti hai.
Ilzaam se nahi, boundary se izzat banti hai.
Control se nahi, care se rishte bachte hain.
Jo apne dard ko sambhalna seekh leta hai,
woh kisi ko hurt nahi karta —
woh bas apni boundary bana leta hai.
Jab aapse kaha jaaye — “Pls stay out of this” —
aur baat physical ya mental abuse ki ho,
to shield ban kar kehna chahiye:
“Main is matter se bahar nahi reh sakta / sakti.
Yeh mere apno ki safety ka sawal hai.”
Family ka matter sirf gents ka nahi hota.
Maa, patni, behen, beti —
sab is system ka hissa hoti hain,
kyunki sabne hi mardon ko paala, ghar sambhala aur rishte jode hote hain.
Har ghar ko yeh seekhna hoga:
“Main cheekh kar nahi —
shaant reh kar apno ko suraksha dunga / dungi.”
🛡️ Shield kabhi shor nahi karti…
Woh shaant reh kar apno ko safe karti hai.
✍️ Anita Agarwal
Healing through Values
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