18/06/2025
जनगढ़ उत्सव
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अपनी असाधारण प्रतिभा से देश और दुनिया को सहअस्तित्व की बुनियाद पर खड़ी नवीनतम चित्र शैली "जनगढ़ कलम" का आवदान देने वाले यशस्वी चित्रकार जनगण सिंह श्याम की जयंती पर उनके जन्मस्थान पाटनगढ़ में रज़ा फ़ाउन्डेशन द्वारा एकदिवसीय "जनगढ़ उत्सव" का आयोजन किया गया ।
"जनगढ़ उत्सव" का आगाज बाना गायकी से हुआ । बाना गायकी विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी एक ऐसी विधा है जिसपर परधान गोंड समाज का अस्तित्व टिका हुआ है, लेकिन अब उसके बिल्कुल गिने चुने कलाकार ही बचे हैं। यह पहला मौका है जब पाटनगढ़, गारकामट्टा और सनपुरी गांव के 6 बाना गायकों ने अपनी सामूहिक प्रस्तुति दी । बाना गायकी में जुगलबंदी का आमतौर पर रिवाज नहीं है । वे सब अलग अलग अपनी ही मस्ती में अपने अपने ढंग से गाते बजाते हैं, इसलिए मंच पर एकसाथ गायकी के लिए बैठे तो सही लेकिन सब एक दूसरे को भूलकर अपने अपने ढंग से ही गाने बजाने लगे । यह अत्यंत रोचक दृश्य था बाद में संचालक ने उन्हें अहसास कराया कि आपसब यदि अलग अलग गायेंगे तो हम कैसे किसी का भी कुछ सुन समझ पाएंगे । तब उन्होंने सुमिरनी अर्थात देवताओं का आवाहन गीत सामरिक रूप से प्रस्तुत किया । जिसे श्री नारायणदीन टेकाम और श्री बालाराम व्याम ने लीड किया ।
इसके पूर्व रज़ा फ़ाउन्डेशन के आजीवन न्यासी श्री उदयन वाजपेयी ने जनगण सिंह श्याम के आदि निवास के पुनर्निर्माण का शिलान्यास किया । जनगण सिंह श्याम की स्मृतियों के संरक्षण की दिशा में रज़ा फ़ाउन्डेशन की ही यह महत्पूर्ण पहल है ।
उत्सव में "जनगण स्मृति व्याख्यान" के साथ ही बाल चित्रकला कार्यशाला, लोकगीत एवं लोकनृत्यों की प्रस्तुति और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदी और लोकभाषा के कवियों ने शिरकत की और अपने रचनापाठ से ग्रामीणजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया ।
प्रथम "जनगण स्मृति व्याख्यान" सुविख्यात कवि लेखक और रज़ा फ़ाउन्डेशन के आजीवन न्यासी श्री उदयन वाजपेयी ने दिया । जनगण सिंह श्याम के व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए आपने कहा कि यह प्रकृति सिर्फ मनुष्यों की और मनुष्यों के लिए नहीं है। इसमें समस्त प्राणियों का सामान महत्व और सामान हक है । "जनगढ़ कलम" सहअस्तित्व की बुनियाद को मजबूती से उभारती है । जनगढ़ के पूर्व इस चित्र शैली की न कोई परंपरा है न इतिहास । यह नवीनतम चित्रशैली जनगण सिंह श्याम का देश और दुनिया को श्रेष्ठतम अवदान है । जिसमें दुनिया को बचाने का संदेश निहित है ।
बाल चित्रकला कार्यशाला में 65 बच्चों ने सहभागिता की और कुछ घंटों में ही डूबकर सुंदर चित्र बनाए । कार्यशाला में बच्चों का उत्साह आनंद विभोर करने वाला था । तो गांव की बेटियों ने सैला, करमा, सुआ, टप्पा आदि लोकगीतों और लोकनृत्यों की सुंदर, सुमधुर और आकर्षक प्रस्तुति से उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया ।
आयोजन के अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन हुआ जिसमें विंध्य और महाकौशल के बघेली, बुंदेली और हिंदी के कवियों ने शिरकत की । कवि सम्मेलन को सुनने के लिए गांव के महिला पुरुष और नौजवान अंत तक जमे रहे और तालियों के जरिए कवियों का भरपूर उत्साहवर्धन किया । कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ नवगीत कवि श्री राम निहोर तिवारी ने और संचालन हिंदी और बघेली के हास्य-व्यंग्य कवि श्री रामनरेश 'निष्ठुर' ने किया । कवि सम्मेलन में श्री अभय तिवारी, डॉ. शिवशंकर ' सरस ', श्रीमती इंदु श्रीवास्तव, श्री शशांक गर्ग, श्री लोकनाथ, श्री विवेक चतुर्वेदी, श्रीमती किरण सिंह 'शिल्पी', श्रीमती सीमारानी झा, श्रीमती विभूति तिवारी , डॉ संतोष तिवारी, सुश्री अलंकृति श्रीवास्तव ने रचनापाठ किया ।
स्व. जनगण सिंह श्याम की धर्मपत्नी श्रीमती ननकुशिया श्याम, उनके यशस्वी पुत्र युवा चित्रकार श्री मयंक श्याम और ग्राम पंचायत पाटनगढ़ के सरपंच श्री चंद्रविजय सिंह ने उत्सव में शामिल सभी अतिथियों का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया और स्मृतिचिन्ह के रूप में सभी को पेंटिंग भेंट की । रज़ा फ़ाउन्डेशन के लिए मयंक श्याम ने अपनी एक बहुत ही सुंदर पेंटिंग श्री उदयन वाजपेयी जी को भेंट की । उत्सव का संयोजन संचालन साहित्यकार व संस्कृतिकर्मी संतोष कुमार द्विवेदी ने किया । आयोजन को सफल बनाने में युवा चित्रकार श्री मयंक श्याम, राहुल श्याम, सुखनंदी व्याम, किशन उइके, रामकुमार श्याम आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
संतोष कुमार द्विवेदी