16/10/2026
प्राइवेसी, प्राइवेसी, प्राइवेसी! हर किसी को आजकल प्राइवेसी का ज्ञान बाँटना है। फेसबुक पर हर तीसरा आदमी मुझे यही समझाने आ जाता है कि बच्चों की फोटो सोशल मीडिया पर मत डालो, अपनी पर्सनल चीजें शेयर मत करो, बच्चों की प्राइवेसी रखो वगैरह-वगैरह। लेकिन मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहती हूँ। क्या आपको सच में लगता है कि आज के समय में आप पूरी तरह प्राइवेट लाइफ जी रहे हैं? आप अपने बच्चों की फोटो सोशल मीडिया पर नहीं डालते, तो क्या आपके बच्चे पूरी तरह सेफ हैं? क्या आप खुद पूरी तरह सेफ हैं? हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ साइबर क्राइम हो रहे हैं, लोगों का डेटा चोरी हो रहा है, आगे से आगे आपकी पर्सनल इनफॉर्मेशन बेची जा रही हैं, और टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है कि हमारी बहुत सारी जानकारी अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। ऐसे में प्राइवेसी को लेकर जागरूक रहना जरूरी है, लेकिन ये मान लेना कि सोशल मीडिया पर फोटो नहीं डालेंगे तो हमारी सारी जानकारी सुरक्षित हो जाएगी ? तो नहीं। आप फोन से फोटो डिलीट कर कर के, चैट डिलीट कर के निश्चिंत हो जाते हो, रीसेट कर के पुराने फोन बेच देते हो तो भी आप का डेटा ज्यों का त्यों रहता है, क्योंकि एक बार अगर फोन में डाटा या कोई फोटो मैसेज आया तो वो हमेशा के लिए फोन में रहता है। और जब जो थॉट्स आपके दिमाग में है जो आपने कंही शेयर नहीं की वही बात आपके फोन को पता है तो किस प्राइवेसी की बात करते हैं लोग। स्मार्टफोन हाथ में लेकर व्हाट्स ऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल प्लेटफार्म पर आकर अपनी फोटो को प्रोफाइल पर लगाकर चले आते हैं प्राइवेसी का ज्ञान देने। अगर कोई आपको नुकसान पहुंचाना चाहता है और उसे आपके बारे में इन्फोर्मेशन चाहिए तो आजकल ऐसे ऐसे तरीके है कि मिनटों में आपकी सारी इन्फोर्मेशन खट से बाहर आ सकती है। अब बात करती हूँ अपनी, मैं फेसबुक पर रावी और रागवी की शरारतें शेयर करती हूँ, कभी उनके घूमने जाने की बात लिख देती हूँ, कभी कुछ अलग खिलाया हो तो बता देती हूँ। कभी कुछ फनी लिखती हूँ, कभी सीरियस बात करती हूँ। जो मेरे मन में आता है, उसे शब्दों में लिखकर पोस्ट कर देती हूँ। क्या मैं सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक का इनका या मेरा पूरा रूटीन शेयर करती हूँ? क्या मैं हर समय कहाँ जा रही हूँ, क्या कर रही हूँ, सब कुछ बताती रहती हूँ? बिल्कुल नहीं। क्या मैंने अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक की जानकारी, निजी दस्तावेज, प्रॉपर्टी के कागज या घर की हर निजी बात सोशल मीडिया पर डाल दी है? नहीं। मैं सिर्फ अपनी जिंदगी के कुछ छोटे-छोटे हिस्से शेयर करती हूँ। कभी बच्चों की शरारतें, कभी कोई मजेदार घटना, कभी अपनी जिंदगी का अनुभव। इससे थोड़े-बहुत पैसे भी बन जाते हैं। लेकिन हर दूसरी-तीसरी लेडी मुझे प्राइवेसी का ज्ञान देने आ जाती है। अरे बहन, आपको अपनी प्राइवेसी रखनी है, आप रखिए। आपको अपने बच्चों की फोटो शेयर नहीं करनी, मत कीजिए। ये आपका फैसला है और मैं उसका सम्मान करती हूँ। लेकिन आप अपने फैसले को दूसरों पर क्यों थोपना चाहती हैं? मेरे बच्चे हैं, उनकी परवरिश की जिम्मेदारी मेरी है। मैं क्या शेयर करूँगी और क्या नहीं, ये फैसला भी मैं ही करूंगी। हाँ, इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि प्राइवेसी की कोई जरूरत नहीं है। बच्चों की सुरक्षा जरूरी है। निजी जानकारी, लोकेशन, स्कूल की जानकारी, पहचान से जुड़े दस्तावेज और दूसरी संवेदनशील चीजें शेयर करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। AI और इंटरनेट के दौर में अपनी डिजिटल सुरक्षा को हल्के में नहीं लेना चाहिए। लेकिन सोशल मीडिया पर फोटो डालने से जोखिम हो सकता है, लेकिन फोटो न डालने से हर तरह का जोखिम खत्म नहीं हो जाता। इसलिए दूसरों को ज्ञान देने से पहले ये समझिए कि हर इंसान की परिस्थितियाँ, जरूरतें और फैसले अलग होते हैं। आपको अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीने का हक है, तो मुझे भी अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीने का हक है। आप अपनी प्राइवेसी रखिए, मैं अपनी समझ से अपनी जिंदगी जीऊँगी। बस बिना माँगे ज्ञान देना बंद कीजिए और जो इंसान अपना काम कर रहा है, उसे करने दीजिए।