13/09/2024
राधाष्टमी
श्री राधारानी के प्राकट्य उत्सव की धूम आज सर्वत्र ही दिखाई दे रही हैं। सभी अपने अपने भाव के अनुसार उनको मनाने में लगे हैं।
राधा रानी को शब्दों में समेटना उतना ही मुश्किल है जैसे रेत को मुठ्ठी में बाँधना।यह तो वह भाव है जिसे हम महसूस कर सकते हैं परंतु वर्णन नहीं कर सकते।
संत जनों ने भी राधा रानी को श्री कृष्ण का ह्रदय ही कहा है तो जैसे किसी के प्रिय,उसके हृदय तक पहुँचकर ही बन पाते हैं वैसे ही श्रीकृष्ण के समीप राधा रानी ही पहुँचा सकती है।बिना उनकी कृपा कि आप अपने आराध्य श्रीकृष्ण को भी नहीं पा सकते है।
राधारानी इतनी कृपालु और दयालु है कि उनको प्रसन्न करने के लिए बहुत साधन,दिखावा नहीं चाहिए। बस आपका सरल हृदय ही काफी है।कहा भी गया है राई के सम भजन को माने मेरू समान।आपको आवश्यकता है तो पूर्ण रूपेण विश्वास और समर्पण की।पूर्ण तो पूर्ण ।ऐसा नहीं कि आधा विश्वास संसार पर और आधा राधारानी पर।
जब आप पूर्णतः उनके हो जाते हैं तो आप कभी भले ही उनको भूल जाए परंतु वे आपका साथ कभी नहीं छोड़ती।किसी न किसी रूप में,किसी न किसी माध्यम से वे आपके साथ ही रहती है ।आप उनको साथ ही महसूस करेंगे।
इतनी कृपालु,इतनी दयामय कोई और हो ही नहीं सकता जो अपने प्रिय भक्त के दो आँसू से ही द्रवित हो जाए।
जीवन की दौड़ भाग में एक क्षण आराम है राधा रानी का साथ।भरी धूप में सुख की छाँव है। कभी न टूटने वाला है एक विश्वास है।उम्मीद का दीया है जो अखंड है और निरंतर जलता ही रहता है।सुख में प्रसन्नता का आभास है और दुख में आशा की किरण है।
राधा रानी से बंधन बाक़ी सभी बंधनों से मुक्ति है ।जैसे अक्षय पात्र हमेशा भरा रहता है कभी ख़ाली नहीं होता,ऐसे ही राधाप्रेम में व्यक्ति कभी अकेला,खालीपन महसूस नहीं करता।वह हमेशा ही उनके प्रेम में मग्न और आनंदित रहता है।
राधा नाम की महिमा का वर्णन रसिकजन और संतजन ने बताया है कि जब अजामिल जैसा प्राणी नाम के सहारे तर सकता है तो अगर हम भाव के साथ राधा नाम का जाप करें तो क्या राधा रानी हम पर कृपा नहीं करेंगी। ऐसे भी कहा गया है कि कलियुग केवल नाम आधारा।
अपनी चिंताओं को राधा नाम चिंतन में लगाईए और उन्ही की शरण में जाइए।सभी की हरती है बाधा, हमारी प्रिय श्री राधा।तो प्रेम से बोलिए राधे राधे!उन्हीं के सहारे उन्हीं की एक सखी,अगला लेख उन्हीं की इच्छा तक…
श्वेता महेश्वरी