07/06/2026
🖋️ मनवा फिर भी भीत
यह हमारी एक मौलिक रचना है, जो आज के रिश्तों, प्रेम, अहंकार और दांपत्य जीवन की अनकही सच्चाइयों को शब्द देने का एक विनम्र प्रयास है।
“घर टूटते नहीं…
बस ‘मैं’ इतना बड़ा हो जाता है कि ‘हम’ दिखाई देना बंद हो जाता है।”
कभी समय मिले तो इस कविता को केवल सुनिए नहीं, अपने भीतर उतरने दीजिए।
यदि इसके भाव आपके हृदय को स्पर्श करें, तो अपना प्रेम, आशीर्वाद और समर्थन अवश्य दीजिए। 🙏❤️
आपकी हर प्रतिक्रिया हमारे लिए प्रेरणा है।