26/08/2026
*यह विज्ञान की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव है, जिसकी कल्पना ३१ साल पहले मैंने 'महाप्रलय की प्रतीक्षा' उपन्यास में की गई थी। इस उपन्यास में एलियन यात्रियों द्वारा मानव मस्तिष्क को एक डाटा सेंटर के रूप में उपयोग करने का उल्लेख था, जो अब वास्तविकता बनता दिख रहा है। तस्वीर दर्शाती है कि 'दुनिया का पहला ह्यूमन ब्रेन सेल डाटा सेंटर' शुरू हो गया है।*
*यह तकनीक मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं को एक नियंत्रित वातावरण में जीवित रखकर, इलेक्ट्रोड्स की मदद से उनसे डेटा प्रोसेस करवाती है। यह पारंपरिक सिलिकॉन चिप्स की तुलना में कई गुना अधिक ऊर्जा कुशल है और डेटा प्रोसेसिंग की गति को भी असाधारण रूप से बढ़ाती है।*
*यह नवाचार चिकित्सा अनुसंधान, एआई, न्यूरोसाइंस और सुपरकंप्यूटिंग में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। एलन मस्क का कथन, "मानव मस्तिष्क प्रकृति का सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर है, हमने बस उसे सही तरीके से इस्तेमाल करना शुरू किया है," इस प्रगति को सही ठहराता है। यह केवल एक शुरुआत है और यह विज्ञान की प्रगति में एक अभूतपूर्व छलांग है।*👍👌👍
**महाप्रलय की प्रतीक्षा में** [विज्ञान-कथा]
© श्री प्रकाश गोविंदवार
**प्रथम संस्करण :**
दिसंबर 1995
**मुखपृष्ठ :**
मनोज नगरकर
**प्रकाशक :**
प्रक्षेप प्रकाशन
टेम्पल बाज़ार, सीतावर्डी,
नागपुर -440 012 दूरभाष - 522602
**मुद्रक :**
सागर फाईन आर्ट्स प्रिंटर्स
टेम्पल बाज़ार, सीतावर्डी, नागपुर-12
**मूल्य : रु. 50/-**
**MAHA PRALAY KEE PRATIKSHA MEIN : Science - Fiction**
**By G. Prakash**
**ISBN 81-86450-08-4**
अंश : गागर में भर गया था। इस समय तक उनके बृहस्पति के इस उपग्रह पर पृथ्वी के समयानुसार पूरे साठ वर्ष बीत चुके थे। उनके लिये यह बहुत कम समय में किया गया अध्ययन कार्य था, यह वैसे उससे भी कम समय में हो सकता था, अगर पृथ्वी के प्रगत जीव से उनकी मित्रता स्थापित हो जाती। लेकिन इन बातों को भूलकर वे अब वापिस जाने की तैयारियों में जुट गये थे, लेकिन इस मार्ग में भी उनके ही संगणक आड़े आ रहे थे। उनसे बिछड़े साथियों ने जो चार बड़े संगणक छोड़ गये थे, उन्हें ले जाने की क्षमता उनकी तीनों भीमकाय उड़नतश्तरियों में नहीं थी और उन्हें ले जाना भी अत्यंत आवश्यक था क्योंकि वे सभी अति महत्वपूर्ण जानकारियों से भरे थे। उसे पाकर उनकी सभ्यता विज्ञान में और भी धनवान हो सकती थी। उसे वे कभी भी यहीं छोड़ कर नहीं जा सकते थे। और उन सभी जानकारियों को समान संकेतों के आधार पर छोटा करना भी इतना आसान नहीं था क्योंकि सभी जानकारियाँ बहुत-सी भिन्नतायें लिये हुये थीं, फिर भी कमांडर इस ओर अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहा था। इससे ज्यादा से ज्यादा एक संगणक का वजन कम किया जा सकता था। आखिर में डॉक्टर महोदय ने इसके लिये एक उपयुक्त पर्याय सुझाया। उनके अनुसार किसी प्राणी के दिमाग में इतनी जानकारियाँ भर कर ले जाया जा सकता है और उसे व्यवस्थित रखने के लिये यान के ही संगणक का उपयोग किया जा सकता है। इससे यान में अनावश्यक बोझ का भी खतरा नहीं था, पर इस कार्य के लिये भी पायलट ने मनुष्यों के दिमाग के उपयोग की बात सुझायी थी, उसके तर्क अनुसार यह जाति प्रकृति के लिये सबसे निरुपयोगी है, इसलिये बेखटके उनके मस्तिष्क का उपयोग जानकारियाँ भर कर ले जाने के लिये उन्हें करना चाहिये। लेकिन डॉक्टर ने पायलट का सुझाव बगैर माने कई अन्य प्राणियों पर यह प्रयोग किये, लेकिन ये सभी प्रयोग असफल रहे। अंततः हारकर डॉक्टर ने मनुष्यों के मस्तिष्क के उपयोग की बात सुझायी और उस पर बहुत कुछ सफलता भी मिली।