Siya ki kahiniyaa

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14/06/2026

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13/06/2026

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बहुत समय पहले कत्युरी वंश के राजा झालराय (कुछ लोककथाओं में राजा हलराय) की सात रानियाँ थीं। लंबे समय तक उन्हें संतान नहीं...
13/06/2026

बहुत समय पहले कत्युरी वंश के राजा झालराय (कुछ लोककथाओं में राजा हलराय) की सात रानियाँ थीं। लंबे समय तक उन्हें संतान नहीं हुई। बाद में राजा ने आठवीं रानी कालिंका से विवाह किया। कुछ समय बाद रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम गोलू रखा गया।
अन्य रानियाँ इस बात से ईर्ष्या करने लगीं। लोककथाओं के अनुसार, उन्होंने नवजात शिशु को एक संदूक में बंद करके नदी में बहा दिया और रानी से झूठ कहा कि उसने पत्थर को जन्म दिया है। एक मछुआरे को वह संदूक मिला और उसने बच्चे का पालन-पोषण किया।
बड़ा होने पर गोलू देवता घोड़े पर सवार होकर अपने वास्तविक माता-पिता की खोज में निकले। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी बुद्धि और दिव्य शक्ति से सत्य को उजागर किया और अन्याय करने वालों को दंड दिया। इसके बाद वे न्याय और सत्य के प्रतीक बन गए।
कहा जाता है कि एक गरीब किसान की जमीन पर एक शक्तिशाली व्यक्ति ने कब्जा कर लिया था। बहुत कोशिशों के बाद भी किसान को न्याय नहीं मिला। निराश होकर उसने गोलू देवता के मंदिर में जाकर अपनी व्यथा लिखकर अर्जी लगा दी। कुछ समय बाद परिस्थितियाँ ऐसी बदलीं कि उसे उसकी जमीन वापस मिल गई। तभी से लोगों का विश्वास और भी मजबूत हो गया कि गोलू देवता सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य सुनते हैं।
उत्तराखंड में एक कहावत भी प्रचलित है—
"गोलज्यू देवता के दरबार में देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं।" 🙏🔔🏔️

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13/06/2026

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एक प्रेरणादायक कहानी – "निशाने का सच्चा खिलाड़ी: जसपाल राणा"उत्तराखंड के पहाड़ों में एक छोटे से शहर उत्तरकाशी में एक बाल...
12/06/2026

एक प्रेरणादायक कहानी – "निशाने का सच्चा खिलाड़ी: जसपाल राणा"
उत्तराखंड के पहाड़ों में एक छोटे से शहर उत्तरकाशी में एक बालक रहता था, जिसका नाम था जसपाल राणा। बचपन से ही उसकी आँखों में कुछ बड़ा करने का सपना था। उसके पिता स्वयं निशानेबाजी से जुड़े थे, इसलिए उन्होंने अपने बेटे को अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया। �
Wikipedia
जब दूसरे बच्चे खेल-कूद में मस्ती करते थे, तब जसपाल घंटों तक अपने निशाने को बेहतर बनाने का अभ्यास करते थे। उनकी मेहनत रंग लाई और बहुत कम उम्र में ही उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने शुरू कर दिए। जल्द ही उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया और 1994 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का नाम रोशन कर दिया। �
Wikipedia
जसपाल राणा ने कभी कठिनाइयों से हार नहीं मानी। एक बार वे तेज दर्द के कारण अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी, लेकिन देश के लिए खेलने का उनका जज़्बा इतना मजबूत था कि वे प्रतियोगिता में उतरे और स्वर्ण पदक जीतने के साथ विश्व रिकॉर्ड भी बना दिया। �
The Economic Times
समय बीता और एक महान खिलाड़ी, एक महान गुरु बन गया। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया। उन्हीं में से एक थीं मनु भाकर, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया। जसपाल राणा हमेशा अपने शिष्यों को यही सिखाते थे कि जीत केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से मिलती है। �
The Times of India
उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। �
Wikipedia
इस कहानी की सीख:
"सपने बड़े हों, मेहनत सच्ची हो और हौसला मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।"
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12/06/2026

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"सफ़र और हमसफ़र" ❤️🏍️रोहन को बाइक चलाने का बहुत शौक था। हर रविवार वह अपनी पसंदीदा बाइक लेकर लंबी राइड पर निकल जाता था। प...
10/06/2026

"सफ़र और हमसफ़र" ❤️🏍️
रोहन को बाइक चलाने का बहुत शौक था। हर रविवार वह अपनी पसंदीदा बाइक लेकर लंबी राइड पर निकल जाता था। पहाड़, घाटियाँ और खुले रास्ते उसे बहुत पसंद थे। लेकिन उसकी हर यात्रा में एक कमी थी—उसके साथ कोई हमसफ़र नहीं था।
एक दिन वह मनाली की तरफ बाइक ट्रिप पर जा रहा था। रास्ते में एक ढाबे पर चाय पीने के लिए रुका। वहीं उसकी मुलाकात नंदिनी से हुई, जो अपनी स्कूटी के खराब हो जाने के कारण परेशान खड़ी थी।
रोहन ने मुस्कुराते हुए पूछा, "अगर आपको बुरा न लगे, तो मैं मदद कर सकता हूँ?"
नंदिनी ने हँसते हुए कहा, "अगर आप मेरी स्कूटी चालू कर दें, तो मैं आपको चाय पिला दूँगी।"
कुछ ही मिनटों में रोहन ने स्कूटी ठीक कर दी। दोनों ने साथ बैठकर चाय पी और बातें शुरू हो गईं। पता चला कि नंदिनी को भी बाइक राइड और घूमने का बहुत शौक था।
उस दिन के बाद दोनों अक्सर वीकेंड पर साथ राइड पर जाने लगे। कभी ऋषिकेश, कभी जयपुर, तो कभी पहाड़ों की घुमावदार सड़कों पर। हर सफ़र के साथ दोनों एक-दूसरे के और करीब आते गए।
एक दिन लद्दाख की यात्रा के दौरान, पैंगोंग झील के किनारे सूरज ढल रहा था। ठंडी हवा चल रही थी। रोहन ने अपनी जेब से एक छोटी-सी अंगूठी निकाली और कहा,
"नंदिनी, अब तक हर सफ़र में तुम मेरे साथ रही हो। क्या तुम पूरी ज़िंदगी मेरी हमसफ़र बनोगी?"
नंदिनी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसने मुस्कुराते हुए कहा,
"हाँ, लेकिन एक शर्त पर..."
रोहन ने पूछा, "क्या?"
नंदिनी हँसते हुए बोली, "हर साल एक नई बाइक ट्रिप ज़रूर करेंगे!"
दोनों हँस पड़े।
एक साल बाद, उनकी शादी हुई। शादी के अगले ही दिन, फूलों से सजी अपनी बाइक पर दोनों एक नई यात्रा के लिए निकल पड़े।
लोग कहते थे कि उनकी जोड़ी सिर्फ पति-पत्नी की नहीं, बल्कि दो सच्चे राइडर्स और दो सबसे अच्छे दोस्तों की थी।
और इस तरह उनका हर सफ़र, प्यार से भरा एक खूबसूरत किस्सा बन गया। ❤️🏍️💍✨
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